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DOES NOT REQUIRE ANY SPECIAL CARE & MANAGEMENT

RABBIT BREEDING

Usually rabbits become mature and suitable for breeding purpose within their 5 to 6 months of age. But don’t use the male rabbits for breeding purpose until they reach their first birthday. Doing this will ensure, quality young rabbits for commercial production. Always try to use healthy rabbits with proper body weight for breeding. Never bred the females, if they are ill. Take special care to the breeding male and pregnant female rabbits, and provide them nutritious feed. The gestation period of rabbits is about 28 to 31 days. And each time a doe can give birth of 2 to 8 kids.

 

खरगोश का प्रजनन प्रबंधन

  • मादा खरगोश- 5-6 महीने
  • नर खरगोश- 5-6 महीने (नर खरगोश 5-6 महीने की उम्र में ही परिपक्‍व हो जाते हैं, लेकिन उच्‍च कोटि के खरगोशों की प्राप्ति के लिए प्रजनन के समय उनकी उम्र एक वर्ष की होनी चाहिए।

प्रजनन के लिए खरगोशों का चुनाव

  • वयस्‍क शारीरिक वजन को प्राप्‍त करने के बाद 5-8 महीने की उम्र में खरगोशों का चुनाव किया जा सकता है।
  • नर और मादा खरगोश के प्रजनन के लिए चुनाव उच्‍च लिटर आकार से होना चाहिए।
  • प्रजनन के लिए स्वस्थ खरगोश का ही चयन किया जाना चाहिए। स्वस्थ खरगोश सक्रिय होते हैं और आमतौर पर भोजन और पानी लेने के मामले में वे सामान्‍य होते हैं। इसके अलावा वे अपने शरीर को साफ रखते हैं। स्वस्थ खरगोश के बाल सामान्‍यत: साफ, मुलायम और चमकीले होते हैं।
  • नर खरगोश के प्रजनन के लिए चुनाव करते समय ऊपर दी गई चीजों के अलावा यह देखना चाहिए कि उसके अण्‍डाशय में दो टेस्टिस हैं या नहीं।
  • नर खरगोश का चुनाव करते समय उन्‍हें मादा खरगोश के साथ यौन क्रिया करने की छूट देनी चाहिए ताकि उसकी प्रजनन क्षमता के बारे में जाना जा सके।

मादा खरगोशों में उत्‍तेजक संकेत या ऋतुचक्र लक्षण

  • खरगोशों में कोई विशिष्‍ट ऋतुचक्र नहीं होता। जब कभी मादा खरगोश नर खरगोश को संभोग के लिए छूट देती है, तभी मादा खरगोश ऋतुचक्र में होती है। कभी-कभी यदि एक मादा खरगोश उत्‍तेजक होती है, उसकी योनि संकुचित होती है। जब नर खरगोश उत्‍तेजना या ऋतुचक्र में मादा खरगोश के पास रखा जाता है, मादा खरगोश उदासीनता दिखाती है और अपने शरीर के पिछले हिस्‍से को ऊपर नहीं उठाती है। उसी समय यदि मादा खरगोश उत्‍तेजक नहीं होती, तो वह पिंजरे के कोने में चली जाती है और नर खरगोश पर हमला कर देती है।

उत्‍तेजक संकेत देने वाली मादा खरगोश को नर खरगोश के पिंजरे में ले जाया जाता है। यदि मादा खरगोश ऋतुचक्र में सही समय में हो तो वह अपनी पूंछ ऊपर उठाकर नर खरगोश को अपने साथ संभोग करने का आमंत्रण देती है। सफलतापूर्वक संभोग के बाद नर खरगोश एक ओर गिर जाता है और विशेष तरह की आवाजें निकालता है। एक नर खरगोश का इस्‍तेमाल सप्‍ताह में 3 या 4 दिन से अधिक के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह एक नर खरगोश को दिन में 2 से 3 बार से अधिक प्रजनन के लिए इस्‍तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। प्रजनन के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाले नर खरगोश को पर्याप्‍त आराम और अच्‍छा पोषण दिया जाना चाहिए। एक रेबीट्री में 10 मादा खरगोशों के लिए एक नर खरगोश होना चाहिए। एक या दो नर खरगोश अतिरिक्‍त पाले जा सकते हैं ताकि यदि प्रजनन के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाले खरगोश बीमार हो गए, तो उनका इस्‍तेमाल किया जा सके। ब्रायलर खरगोशों के मामले में गर्भावधि 28 से 31 दिन की होती है। गर्भावस्‍था का पता प्रजनन के 12-15 दिन बाद मादा खरगोश के पेट को छूकर लगाया जा सकता है। पिछले पैरों के बीच में पेट के हिस्‍से में स्‍पर्श क्रिया करनी चाहिए। यदि कोई गोलमटोल सा हिस्‍सा उंगुलियों के बीच में पकड़ में आता है, इसका मतलब मादा खरगोश गर्भवती है। जो मादा खरगोश 12-14 दिन बाद गर्भवती नहीं हुई हों, उन्‍हें नर खरगोश के साथ फिर से संभोग करने दिया जाना चाहिए। यदि कोई मादा खरगोश लगातार तीन बार संभोग के बाद भी गर्भवती नहीं हुई हो, तो उस खरगोश को फार्म से निकाला जा सकता है।

आमतौर पर संभोग के 25 दिन बाद से गर्भवती मादा खरगोशों का वजन 500 से 700 ग्राम बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए वजन को खरगोशों को उठाकर देखा जा सकता है। यदि गर्भवती मादा खरगोश को नर खरगोश के साथ संभोग करने की छूट दी जाए, तो वे ऐसा नहीं करेंगे।

खरगोशों का प्रजनन

प्रजनन के बारे में विस्‍तृत सूचना

नर:मादा अनुपात 1:10
पहले संभोग के समय आयु 5-6 महीने। नर खरगोश पहले संभोग के दौरान अच्‍छे लिटर आकार के लिए आमतौर पर 1 वर्ष के होते हैं।
संभोग के समय मादा खरगोश का वजन 2.25-2.5 किलो
वृद्धि का समय 28-31 दिन
दूध छुड़ाने की उम्र 6 हफ्ते
किंडलिंग के बाद संभोग का समय किंडलिंग के 6 हफ्ते बाद या छोटे खरगोशों के दूध छुड़ाने के बाद
बेचने के समय आयु 12 हफ्ते
बेचने के समय वजन लगभग 2 किलो या उससे बड़े

 

 

गर्भवती मादा खरगोश की देखभाल

गर्भावस्‍था का पता लगाने के बाद गर्भवती मादा खरगोश को सामान्‍य भोजन से 100 से 150 ग्राम अधिक मुख्‍य भोजन की मात्रा खिलाई जानी चाहिए। गर्भवती मादा खरगोश को संभोग के बाद 25वें दिन पिंजरे में भेजा जा सकता है। संभोग की संभावित ति‍थि के पांच दिन पहले नेस्ट बॉक्‍स को पिंजरे में रखा जा सकता है। सूखे नारियल के रेशे या धान की फूस का इस्‍तेमाल नेस्ट बॉक्‍स में बिछाने की सामग्री के तौर पर किया जाता है। गर्भवती मादा खरगोश अपने पेट से बालों को तोड़ देती है और किंडलिंग के एक या दो दिन पहले नवजात के लिए एक नेस्ट का निर्माण करती है। इस समय के दौरान खरगोश को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और बाहर से लोगों को किंडलिंग पिंजरे के पास आने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

आमतौर पर कींडलिंग सुबह जल्‍दी होती है। सामान्‍यतौर पर कींडलिंग 15 से 30 मिनट की अवधि में समाप्‍त होती है। डैम अपने आपको और अपने छोटे बच्‍चे को सुबह जल्‍दी ही साफ कर लेती है। नेस्ट बॉक्‍स की जांच सुबह जल्‍दी ही कर ली जानी चाहिए। मरे हुए बच्‍चे को नेस्ट बॉक्‍स से तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। नेस्ट बॉक्‍स की जांच के दौरान डैम बेचैन हो सकती है। इसलिए डैम को नेस्ट बॉक्‍स की जांच के पहले ही हटा लिया जाना चाहिए।

 

नवजात खरगोश की देखभाल और प्रबंधन

जन्‍म के दौरान पैदा हुए खरगोश की आंखें बंद होती हैं और उनके शरीर पर बाल नहीं होते। सभी नए पैदा हुए खरगोश आमतौर पर नेस्ट बॉक्‍स में डैम द्वारा बनाए गए बिछौने पर लेटते हैं। आमतौर पर डैम सुबह के समय दिन में एक बार अपने पैदा हुए बच्‍चे को दूध पिलाती है। यदि हम मादा खरगोश के लिए बच्‍चे को दिनभर दूध देने के लिए बाध्य करेंगे तो वह अपना दूध नहीं निकालेगी। आमतौर पर पैदा हुए खरगोशों की त्‍वचा अपनी मां से प्राप्‍त दूध की पर्याप्‍त मात्रा से चमकीली होती है। लेकिन जिन खरगोशों को अपनी मां से पर्याप्‍त दूध नहीं मिल पाता, उनकी त्‍वचा सूखी होती है और उस पर झुर्रियां दिखाई पड़ती हैं और उनके शरीर का तापमान निम्‍न रहता है एवं वे आलसी दिखाई देते हैं।

सौतेली मां से स्तनपान

आमतौर पर एक मादा खरगोश के 8 से 12 स्‍तनाग्र होते हैं। जब लिटर की संख्‍या स्‍तनाग्र की संख्‍या से ज्यादा होती है तो नए पैदा हुए खरगोश पर्याप्‍त मात्रा में दूध नहीं प्राप्त कर पाते और उसका परिणाम उनकी मौत के रूप में आता है। दूसरी ओर अन्य परिस्थिति में जैसे उसकी अच्छी तरह से देखभाल में कमी के कारण उनकी मौत भी संभव है। ऐसे में सौतेली मां का इस्तेमाल नए बच्‍चे की नर्सिंग के लिए किया जाता है।

सौतेली माता के लिटर बदलने के दौरान ध्‍यान रखने वाले बिंदु

  • बदले जाने वाले बच्चों और सौतेली मां के बच्चों के बीच उम्र का अंतर 48 घंटे से ज्‍यादा नहीं होना चाहिए
  • तीन से ज्यादा बच्चों या सौतेली मांओं को नहीं बदला जाना चाहिए
  • छोटे खरगोशों को नेस्ट बॉक्‍स में तीन सप्ताह का होने तक ठहराया जाता है। बाद में नेस्ट बॉक्‍स को किंडलिंग पिंजरे से हटा दिया जाता है। छोटे खरगोशों से 4 से 6 हफ्ते की उम्र में दूध छुड़ाया जा सकता है। दूध छुड़ाते समय पहले डैम को किंडलिंग पिंजरे से हटाना चाहिए और छोटे खरगोशों को उसी पिंजरे में 1 से 2 हफ्ते रखा जाना चाहिए। बाद में खरगोशों का लिंग पहचाना जाना चाहिए और फिर अलग-अलग लिंग के खरगोशों को अलग-अलग पिंजरों में रखा जाना चाहिए। हमें अचानक खरगोशों के भोजन में परिवर्तन नहीं करना चाहिए।

छोटे खरगोशों की मृत्यु दर में कमी

शुरुआती 15 दिनों तक छोटे खरगोश डैम के साथ रहते हैं। इस समय के दौरान केवल माता का दूध ही पैदा हुए बच्चे के लिए भोजन होता है। इस समय में छोटे खरगोशों की मौत मुख्‍यत: डैम के चलते होती है। 15 दिनों के बाद छोटे खरगोश पानी और खाना लेने में सक्षम हो जाते हैं। इस समय में वे बीमारियों के प्रति कम प्रतिरोधी होते हैं, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि डैम और छोटे खरगोश को उबाला हुआ ठंडा पानी दिया जाना चाहिए। एक मिलीलीटर हाइड्रोजन पेरोक्‍साइड को एक लीटर पानी में खरगोशों को उपलब्‍ध करवाए जाने से 20 मिनट पहले मिलाया जाना चाहिए।

खरगोश की प्रजातियां

भारी वजन वाली किस्‍में (4 से 6 किलो)

  • व्‍हाइट जायंट
  • ग्रे जायंट
  • फ्लैमिश जायंट

मध्‍यम वजन वाली प्रजातियां (3 से 4 किलो)

  • न्‍यूजीलैंड व्‍हाइट
  • न्‍यूजीलैंड रेड
  • कैलीफोर्नियन

कम वजन वाली प्रजातियां (2 से 3 किलो)

  • सोवियत चिनचिला
  • डच

 

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There’s a good chance of rabbit farming, and business production may be a good supply of financial gain and employment in India farming sector. Rabbits would like little place for living and fewer food for living.

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