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DOES NOT REQUIRE ANY SPECIAL CARE & MANAGEMENT

 रैबिट फार्मिंग का बढ़ा चलन, लेकिन खरगोश की बीमारी की नहीं जानकारी

 

साफ-सफाई व दवा से स्वस्थ रखे जा सकते हैं रैबिट, पिंजरे रखे जाने वाले ढांचे में सफेदी भी करवाएं

पिछले सालों से रैबिट फार्मिंग का चलन काफी बढ़ा है लेकिन किसान खरगोश में होने वाले बीमारियों से ज्यादा परिचित नहीं है। ऐसे में उन्हें कई बार अच्छा खास नुकसान भी उठाना पड़ता है। खरगोशों में अक्सर पिस्सू लगना और फंगस के चलते संक्रमण होने की समस्याएं आमतौर पर देखने में आती हैं। यहां इनके बचाव व उपचार के तरीके बताए जा रहे हैं।

पिस्सू लगना

लगातार खांसने और छींकने के दौरान खरगोश अपनी नाक अपने आगे के पैरों से लगातार खुजलाते हैं। श्‍वसन के दौरान निकलने वाली आवाज बरतनों की खडख़ड़ाहट जैसी होती है। इसके अलावा इनमें बुखार और हैजा भी होता है। इसके लिए जिम्‍मेदार सूक्ष्‍म जीवाणु ही उनकी त्‍वचा के नीचे पिस्‍सू पैदा कर देते हैं और उनका गला खराब कर देते हैं।

उपचार: पिस्‍सू लगने की स्थिति में उपचार उतना प्रभावी नहीं होता। भले ही इनसे ग्रस्‍त खरगोश ठीक हो जाते हैं, लेकिन वे अन्‍य स्‍वस्‍थ खरगोशों को संक्रमित कर सकते हैं। ऐसे खरगोशों को फार्म से बाहर निकाल देना सही उपाय है।

फंगस से संक्रमण

खरगोशों में त्‍वचा का संक्रमण डर्मेटोपाइसिस फंगस से होता है। कान और नाक के आसपास बाल की कमी हो जाती है। खुजली के कारण खरगोश लगातार संक्रमित क्षेत्रों में खुजली करते हैं जिससे उस हिस्‍से में घाव हो जाते हैं। इसके बाद इन इलाकों में बैक्‍टीरिया के संक्रमण से पस बनना शुरू हो जाता है।

उपचार:प्रभावित हिस्‍सों पर ग्रीसियोफुल्विन या बेंजाइल बेंजोएट क्रक्रीम लगानी चाहिए। इस बीमारी के नियंत्रण के लिए भोजन में प्रति किलो 0.75 ग्राम ग्रीसियोफुल्विन मिला कर दो हफ्ते तक दिया जाना चाहिए।

बीमारी नियंत्रित करने के लिए स्वच्छता मानक

खरगोश फार्म ऐसे स्‍थान पर होना चाहिए जो पर्याप्‍त हवादार हो।
पिंजरे साफ होने चाहिएं।
खरगोशों की झोपड़ी के चारों ओर पेड़ होने चाहिए।
साल में दो बार ढांचे की सफेदी भी करवाएं।

हफ्ते में दो बार पिंजरों के नीचे चूने का पानी छिड़कना चाहिए
गर्मी में खरगोशों पर पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए
पीने के लिए पानी देने से पहले उसे अच्‍छी तरह उबाल कर ठंडा कर लेना चाहिए। विशेषकर नवजात खरगोशों के लिए यह बेहद जरूरी है।
बैक्‍टीरियाई सूक्ष्‍म जीवाणुओं से होने वाली बीमारी को रोकने के लिए प्रति ‍लीटर पीने के पानी में 0.5 टेट्रासाइक्‍लीन मिलानी चाहिए और हर महीने में तीन दिन इसे दें।

 Health

The animals have to be healthy. The main signs are a smooth skin, standing ears, clear eyes, quiet breathing, no mange (scabies) forming  crusts around the nose, eyes, at the edges of the ears or inside the ears  as a dirty mass. Put them on the ground and let them jump to watch

for irregular legs, inspect the anus to see whether it is dirty from diar- rhoea (should not be!) which is often the case in young rabbits. Check  the stomach (abdomen) of the animal. It should feel soft but smooth; a  spongy feeling may indicate some intestinal troubles (see Chapter 8 on

sick animals). Watch for sneezing rabbits. Dirty front legs and/or dirty  nose may indicate a coughing disease (pasteurellose), because the  animals “wash” their nose with their front legs.

Treatment

This can be completely effective if the instructions going with the  medicin are followed carefully. With good insecticides like NEGU- VON or ASUNTOL (also other tick medicines either for cattle, dogs  or cats) bathe the animal completely to eradicate the parasites. You

should keep the nose and mouth above surface. Make sure to use the  right concentrations, and do not use cold water in a cold place. The  animals will dry off by themselves (sunshine or other warmth will  help). If you do not bathe them completely, the parasite will keep  coming back from its hiding place. Use the bathing water to clean the  stable walls and floor to kill the parasites there. Often other local  medicines can be effective (like sulphur solutions). A definite disad- vantage of oil (although effective) is its dirtiness. Moreover, just like  kerosene it gives a burning sensation. If you do not believe that, put  some gasoline or kerosene on your upper lip!

 Other diseases and health problems

Use common sense. The most common problems are: sore hocks (ap- pears to be hereditary), lame animals (variety of causes), injuries, sore Sick animals 50  breasts, mastitis. Do not waste too much time waiting to see what will  happen. Use your time and energy for more relevant matters, eat the  animal or let somebody else eat the animal. Besides being practical,  you will save the animal a lot of suffering. In the long run you are se- lecting the best and healthiest animals for your further breeding.

 

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There’s a good chance of rabbit farming, and business production may be a good supply of financial gain and employment in India farming sector. Rabbits would like little place for living and fewer food for living.

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